1. Hindi News
  2. धर्म
  3. Parama Ekadashi 2026 Katha, Muhurat Live: आज है परमा एकादशी, यहां पढ़ें इसकी पावन कथा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Parama Ekadashi 2026 Katha, Muhurat Live: आज है परमा एकादशी, यहां पढ़ें इसकी पावन कथा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Updated : Jun 11, 2026 10:09 am IST

June Parama Ekadashi Vrat 2026 Live: जून महीने में परम एकादशी और निर्जला एकादशी मनाई जाएगी। जिसमें 11 जून को पहले परम एकादशी का व्रत रखा जाएगा। ये अधिकमास की एकादशी होती है जो तीन साल में एक ही बार आती है। यहां आप जानेंगे परम एकादशी व्रत से जुड़ी हर एक जानकारी।

parama ekadashi vrat 2026- India TV Hindi
परम एकादशी व्रत 2026 Image Source : INDIA TV

June Parama Ekadashi Vrat 2026 Date, Shubh Muhurat, Vrat Katha, Paran Time: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस व्रत को नियम से रखता है उसे श्री हरि विष्णु भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पा लेता है। 11 जून 2026, गुरुवार को परम एकादशी व्रत रखा जाएगा। जिसे अधिकमास की एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दुर्लभ एकादशी का व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। चलिए जानते हैं परम एकादशी की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती समेत सारी जानकारी।

परमा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

  • सुबह का उत्तम मुहूर्त: 05:23 AM से 07:07 AM तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:53 AM से 12:49 PM तक
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त: 12:21 PM से 02:05 PM तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग - पूरे दिन

परम एकादशी पूजा विधि

  • 11 जून को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हों पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
  • इसके बाद अपने हाथ में थोड़ा सा जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा पर थोड़ा सा गंगाजल छिड़कें। आप चाहें तो गंगाजल से स्नान भी करा सकते हैं।
  • अब भगवान को पीले फूल, माला, फल, भोग और तुलसी दल अर्पित करें।
  • इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • फिर परमा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें।
  • अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक की क्षमा मांगें।
  • भगवान को भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांट दें।
  • ध्यान रहे इस व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है। व्रती पूरे दिन व्रत रहकर अगले दिन इसका पारण करता है।

परम एकादशी व्रत पारण का समय 2026

परम एकादशी व्रत खोलने का समय 12 जून 2026 को सुबह 05:23 से सुबह 08:10 के बीच है। इस समय के दौरान जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देकर सात्विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत पारण करें।

परम एकादशी व्रत कथा

परम एकादशी व्रत कथा अनुसार प्राचीन काल में काम्पिल्य नगर में सुमेधा नामक का एक ब्राह्मण रहता था। जिसकी पत्नी का नाम पवित्रा था। ब्राह्मण की स्त्री परम सती और साध्वी थी। दोनों निर्धनता में जीवन बिताते हुए भी परम धार्मिक थे। एक दिन ब्राह्मण ने अपनी गरीबी से परेशान होकर परदेश जाने का विचार किया, लेकिन उसकी पत्नी ने उसे समझाया कि 'स्वामी धन और संतान पूर्वजन्म के दान से ही प्राप्त होते हैं, अत: आप इसे लेकर परेशान न हों।'

एक दिन महर्षि कौडिन्य ब्राह्मण के घर आए। ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने महर्षि की तन-मन से उनकी सेवा की। महर्षि ने उन दोनों को परमा एकादशी का व्रत करने को कहा और बताया कि 'इस व्रत को करने से तुम्हें दरिद्रता से मुक्ति मिल जाएगी। तुम दोनों मिलकर इस व्रत को रखें और व्रत वाले दिन रात्रि जागरण करो।' महर्षि के कहे अनुसार दोनों ने व्रत किया। इसके बाद उनके समस्त दुख दर्द दूर हो गए।

June Ekadashi Vrat 2026 Live: परमा एकादशी कथा, पूजा विधि और पारण समय

Auto Refresh
Refresh
  • 9:52 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परम एकादशी व्रत में किस चीज का भोग लगाएं?

    परम एकादशी के दिन भगवान विष्णु को मालपुए, खीर, फल, मिठाई इत्यादि का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि भगवान के भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल हों।

  • 9:36 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Shri Vishnu Sahastranaam Stotram: परम एकादशी पर जरूर सुनें विष्णु सहस्रनाम

  • 9:11 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परम एकादशी पर 33 मालपुए का करें दान

    अगर आपने अधिक मास में 33 मालपुए का दान नहीं किया है तो आप परम एकादशी पर इस दान को करके पुण्य कमा सकते हैं। कहते हैं एकादशी पर इसका दान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • 8:50 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Parama Ekadashi Saral Puja Vidhi: परम एकादशी पर पूजा कैसे करें

    परम एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की सरल विधि यहां देखें...

    parama ekadashi puja vidhi
    Image Source : INDIA TVपरम एकादशी पूजा विधि

     

  • 8:33 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परम एकादशी व्रत में किसकी पूजा होती है?

    परम एकादशी व्रत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यताओं अनुसार इस दिन व्रत रखने और पूजन करने से जीवन के सभी पापों और कष्टों का अंत हो जाता है।

  • 7:43 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ekadashi Ke Din Kya Kya Nahi Khana Chahiye: एकादशी के दिन क्या-क्या नहीं खाना चाहिए

    एकादशी के दिन चावल भूलकर भी नहीं खाना चाहिए। वहीं व्रत रखने वाले लोगों को इस दिन अन्न का पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए।

  • 7:15 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Parama Ekadashi Ki Aarti: परम एकादशी आरती लिरिक्स

    ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।

    विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।

    गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।

    शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    पौष के कृष्णपक्ष की,सफला नामक है।

    शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    नाम षटतिला माघ मास में,कृष्णपक्ष आवै।

    शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।

    पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।

    नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,वैसाख माह वाली॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।

    नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।

    देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।

    श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।

    इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।

    रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।

    पावन मास में करूंविनती पार करो नैया॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।

    शुक्ल मास में होयपद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।

    जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥

    ॐ जय एकादशी...॥

  • 6:20 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Parama Ekadashi Vrat Katha: परमा एकादशी व्रत कथा

    काम्पिल्य नाम की नगरी में सुमेधा नाम का एक धर्मात्मा ब्राह्मण रहता था। पूर्व जन्म के पाप के कारण वह और उसकी पत्नी गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे थे। भिक्षा मांगने पर भी उन्हें कोई भिक्षा नहीं देता था।  हर चीज का अभाव होने के बाद भी उस ब्राह्मण की पत्नी अपने पति की सच्चे मन से सेवा किया करती थी और घर आए अतिथि को अन्न देकर स्वयं भूखी रह जाती थी। एक दिन ब्राह्मण अपनी स्त्री से बोला कि प्रिय! जब मैं अमीरों धन की याचना करता हूं तो वह मेरी सहायता करने से साफ-साफ मना कर देते हैं। लेकिन गृहस्थी धन के बिना नहीं चलती, इसलिए यदि तुम सहमति हो तो मैं परदेस जाकर कुछ पैसा कमाकर ले आऊं।

    ब्राह्मण की पत्नी ने कहा हे स्वामी! मैं आपकी दासी हूं। पति अच्छा या बुरा जो कुछ भी कहे पत्नी को वही करना चाहिए। स्वामी मनुष्य को पूर्व जन्म के कर्मों का फल मिलता है। पूर्व जन्म में जो मनुष्य विद्या और भूमि का दान करते हैं, उन्हें अगले जन्म में ये दोनों चीजें जरूर प्राप्त होती हैं। ईश्वर ने जिसके भाग्य में जो लिख दिया है उसे कोई टाल नहीं सकता। यदि कोई मनुष्य दान नहीं करता तो प्रभु उसे केवल अन्न ही देते हैं। अत: आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं आपसे अलग नहीं रह सकती। पति के बिना रह रही स्त्री की सभी निंदा करते हैं। हे स्वामी! मेरी आपसे यही विनती है कि कृपा कर आप कहीं न जाएं, जो भाग्य में होगा वहीं हमें मिलेगा। 

    अपनी स्त्री की सलाह मानकर ब्राह्मण कहीं नहीं गया और वो दोनों इसी प्रकार दुख और गरीबी में समय व्यतीत करते रहे। एक बार उनके घर पर कौण्डिन्य ऋषि आए। ब्राह्मण सुमेधा और उनकी स्त्री ने उन्हें प्रणाम किया और बोले कि आज हमारा जीवन धन्य हो गया है। आपके दर्शन पाकर हम बेहद सुख का अनुभव कर रहे हैं। ऋषि को उन्होंने पवित्र मन से भोजन कराया। भोजन के बाद ब्राह्मणी ने कहा हे ऋषिवर, कृपा कर आप मुझे गरीबी दूर करने का उपाय बताएं। मैंने अपने पति को परदेश जाकर धन कमाने से रोका है और भाग्य से आपके दर्शन हमें प्राप्त हुए हैं। अत: मुझे पूर्ण विश्वास है कि अब हमारी दरिद्रता जल्दी ही दूर हो जाएगी। 

    कौण्डिन्य ऋषि बोले हे ब्राह्मणी, अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परमा एकादशी का व्रत रखों। इस व्रत को करने से सभी पापों, दुःखों और दरिद्रता का नाश हो जाता है। इस व्रत में अन्न का पूरी तरह त्याग कर देना चाहिए और रात्रि जागरण करना चाहिए। यह एकादशी व्रत धन-वैभव प्रदान करता है। धनाधिपति कुबेर ने भी इस व्रत का पालन करके ही भगवान भोलेनाथ से धनाध्यक्ष का पद प्राप्त किया था। इसी व्रत को करने से सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र को उनका राज्य और वैभव वापस प्राप्त हुआ था। 

    आगे ऋषि ने कहा: हे ब्राह्मणी! पंचरात्रि व्रत तो इससे भी ज्यादा उत्तम है। अगर परमा एकादशी के दिन से शुरू करके अमावस्या तक व्रत रखा जाए तो स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती। जो मनुष्य इन पांच दिन व्रत रहकर ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं, वे समस्त संसार को भोजन कराने का फल प्राप्त करते हैं। जो मनुष्य इस व्रत में ब्राह्मण को तिल दान करते हैं, वे तिल की संख्या के बराबर वर्षो तक भगवान विष्णु के लोक में वास करते हैं। हे ब्राह्मणी! यदि तुम अपने पति के साथ इस व्रत को रखती हो तो तुम्हें अवश्य ही स्वर्ग की प्राप्ति होगी।

    ऋषि के कहे अनुसार ब्राह्मण और उसकी स्त्री ने परमा एकादशी से लेकर अमावस्या तक यानी 5 दिन का व्रत किया। व्रत के समाप्त होते ही ब्राह्मण की स्त्री ने एक राजकुमार को अपने यहां आते देखा। राजकुमार ने ब्रह्माजी की प्रेरणा से ब्राह्मण को एक भव्य घर रहने के लिए दिया। साथ ही राजकुमार ने आजीविका के लिए उन्हें एक गांव भी दिया जिससे उनकी गरीबी दूर हो गई।

  • 11:46 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Parama Ekadashi: परम एकादशी के दिन विष्णु भगवान के इन 11 नामों का जप करना बेहद शुभ

    1. विष्णु
    2. नारायण 
    3. श्रीधर
    4. गोविंद 
    5. जनार्दन
    6. प्रजापति
    7. पद्मनाभ
    8. चक्रधर
    9. त्रिविक्रम
    10. वाराह 
    11. वामन
  • 11:14 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    भगवान विष्णु को भोग लगाते समय किस मंत्र का जप करना चाहिए?

    भगवान विष्णु को भोग लगाते समय नीचे दिए गए मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र का जप करते हुए भोग लगाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और आपके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 

    मंत्र-

    "त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।
    गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर॥"

  • 10:32 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Param Ekadashi Upay: वैवाहिक जीवन में खुशियां लाने के लिए परम एकादशी का उपाय

    परम एकादशी के दिन एक आसान सा उपाय करके आप वैवाहिक जीवन में सुख पा सकते हैं। आपको करना बस इतना है कि परम एकादशी के दिन सुबह स्नान-ध्यान और पूजन करने के बाद केले के वृक्ष की जड़ में पानी अर्पित करना है और दीपक जलाकर भगवान विष्णु से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करनी है। 

  • 10:01 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    परम एकादशी पर करें शालीग्राम का पंचामृत अभिषेक

    परम एकादशी के शुभ दिन पर आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद सूर्य देव को जल का अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद शालीग्राम भगवान की पूजा करनी चाहिए। शालीग्राम पर गोपीचंदन लगाकर फूलमाला उन्हें अर्पित करनी चाहिए। इसके बाद धूप, दीप जलाकर शालीग्राम भगवान की पूजा करनी चाहिए और उसके बाद पंचामृत से शालीग्राम भगवान का अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन के सभी दुख दूर होते हैं। 

  • 9:23 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    परम एकादशी पर करें इन चीजों का दान कुंडली गुरु होंगे मजबूत

    ज्योतिष शास्त्र में गुरु को सुख-वैभव, आर्थिक उन्नति और ज्ञान का कारक माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन पड़ने वाली परम एकादशी के दिन आपको गुरु से संबंधित चीजों जैसे केला, पीले वस्त्र, पीली मिठाइयां, धार्मिक पुस्तकें आदि का दान करना चाहिए। इन चीजों का दान करने से गुरु मजबूत होंगे और आपके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी। 

  • 9:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Lakshmi Chalisa: परम एकादशी पर लक्ष्मी चालीसा का पाठ कर पाएं माता लक्ष्मी का आशीर्वाद

    ॥दोहा॥
    मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।

    मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

    सोरठा 
    यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
    सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

    ॥चौपाई॥
    सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥

    श्री लक्ष्मी चालीसा

    तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
    जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
    तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
    जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
    विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
    केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
    कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

    ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
    क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
    चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
    जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
    स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
    तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
    अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

    तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
    मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥
    तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
    और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
    ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
    त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

    जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
    ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
    पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
    विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥

    पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
    सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
    बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
    प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
    बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
    करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥

    जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
    तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
    मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
    भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥

    बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
    नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
    रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
    केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

    ॥दोहा॥
    त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
    रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

  • 8:33 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Parama Ekadashi: परम एकादशी पर करें इस मंत्र का 108 बार जप, मनोकामनाएं होंगी पूरी

    परम एकादशी के शुभ अवसर पर आपको भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का कम से कम 108 बार जप जरूर करना चाहिए। इस दिन किया गए भगवान विष्णु के इस जप से आपको जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और साथ ही आपकी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। 

  • 7:47 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Parama Ekadashi: परम एकादशी की रात करें ये शुभ काम

    परम एकादशी की रात्रि में नीचे दिए गए कार्यों को करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

    • भजन-कीर्तन 
    • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप
    • जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाना 
    • नाम जप करना 
    • गीता और रामचरितमानस जैसी धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करना 

     

  • 7:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Param Ekadashi: परम एकादशी के दिन इन 3 चीजों को घर लाना शुभ

    • तुलसी का पौधा
    • दक्षिणावर्ती शंख 
    • श्रीयंत्र

    इन चीजों को परम एकादशी के दिन घर लाने से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद आपको मिलता है। 

  • 6:34 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Param Ekadashi: परम एकादशी के दिन करें विष्णु चालीसा का पाठ

    विष्णु चालीसा

    दोहा

    विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।
    कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।।

    चौपाई 

    नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी।
    प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी।।

    सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत।
    तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत।।

    शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे।
    सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे।।

    सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन।
    सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन।।

    पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण।
    करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण।।

    धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा।
    भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा।।

    आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया।
    धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।

    अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया।
    देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।

    कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया।
    शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया।।

    वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया।
    मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया।।

    असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई।
    हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।

    सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी।
    तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।

    देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी।
    हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।

  • 5:45 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Param Ekadashi: भगवान विष्णु को गलती से भी न लगाएं इन चीजों का भोग

    परम एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के दौरान आपको कुछ चीजों का भोग लगाने से बचना चाहिए। इनमें सबसे पहला नाम आता है सरसों के तेल का, सरसों के तेल से बनी कोई भी वस्तु भगवान विष्णु को अर्पित न करें। इसके साथ ही बैंगन, सेमफ और मूली का भोग भी विष्णु भगवान को नहीं लगाना चाहिए। 

  • 5:05 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Param Ekadashi: परम एकादशी के दिन इस दिशा में बैठकर करें विष्णु-लक्ष्मी पूजन

    परम एकादशी के दिन आपको भगवान विष्णु और माता-लक्ष्मी की पूजा सही दिशा में बैठकर करनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा के लिए सबसे शुभ दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) होती है। इस दिशा के अलावा आप पूर्व दिशा की ओर मुख करके भी पूजने कर सकते हैं। 

  • 4:14 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Parama Ekadashi: परम एकादशी के दिन बनेगा महालक्ष्मी योग, इन मंत्रों के जप से दूर होंगी आर्थिक समस्याएं

    परम एकादशी 11 जून को है और इस दिन सुबह के समय चंद्रमा मीन राशि से निकलकर मेष में गोचर करेंगे। ऐसे में चंद्र-मंगल की युति से मेष राशि में महालक्ष्मी योग बनेगा। इस योग के चलते अगर आप परम एकादशी के दिन माता लक्ष्मी के नीचे दिए गए मंत्रों का जप करते हैं तो आपको धन-धान्य की प्राप्ति हो सकती है। 

    • ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।।
    • ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्म्यै नमः।।
    • ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।।
  • 3:33 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Parama Ekadashi: परम एकादशी का व्रत रखने के लाभ?

    परम एकादशी का व्रत रखने से दुख और दरिद्रता से भक्तों को मुक्ति मिलती है। 
    जाने-अनजाने में हुए पाप भी नष्ट होते हैं। 
    मानसिक रूप से व्यक्ति का शुद्धिकरण होता है। 
    परम एकादशी का व्रत रखने वाले को अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

  • 2:53 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Parama Ekadashi 2026: परम एकादशी पर क्या न करें

    • परम एकादशी पर तुलसी दल न तोड़ें क्योंकि इस दिन तुलसी तोड़ना अशुभ माना जाता है।
    • एकादशी पर चावल का सेवन भूलकर भी न करें।
    • इस दिन घर में क्लेश करने से भी बचें क्योंकि इससे माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं।
  • 2:06 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Parama Eakdashi 2026: परम एकादशी पारण समय

    परम एकादशी का पारण समय 12 जून की सुबह 05:23 से 08:10 बजे तक रहेगा। इस बीच आप सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत खोल सकते हैं।

     

  • 1:55 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परमा एकादशी पर क्या दान करना चाहिए?

    परम एकादशी पर भोजन, अन्न, जल, फल इत्यादि का दान करना चाहिए। इस दिन जरूरतमंदों और दिव्यांगजनों की सहायता करना बेहद शुभ माना गया है।

  • 1:27 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    11 जून के बाद परम एकादशी कब पड़ेगी

    11 जून 2026 के बाद परम एकादशी 9 अप्रैल 2029 को पड़ेगी। 2029 में ये एकादशी व्रत चैत्र महीने में रखा जाएगा।

  • 1:11 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परम एकादशी की आरती

    • ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
    • भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
    • स्वामी दुःख विनसे मन का।
    • सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
    • स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
    • तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
    • स्वामी तुम अन्तर्यामी।
    • पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
    • स्वामी तुम पालन-कर्ता।
    • मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
    • स्वामी सबके प्राणपति।
    • किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
    • स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
    • अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
    • स्वमी पाप हरो देवा।
    • श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
    • श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
    • स्वामी जो कोई नर गावे।
    • कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
    • ॐ जय जगदीश हरे।
  • 12:17 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परम एकादशी पूजा मंत्र

    परम एकादशी के दिन भगवान विष्णु के 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप जरूर करें। कहते हैं इस मंत्र के जाप से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

  • 11:53 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परम एकादशी हर साल में क्यों नहीं होती है?

    दरअसल परम एकादशी व्रत अधिक मास के दौरान आता है। जैसा कि सभी जानते हैं कि अधिक मास तीन साल में एक ही बार होता है इसलिए परम एकादशी व्रत भी तीन साल में एक ही बार आता है।

  • 11:13 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    एकादशी व्रत किसलिए रखा जाता है?

    एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। कहते हैं जो भी भक्त सच्चे मन से ये व्रत रखता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पापों का नाश हो जाता है।

  • 10:48 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    परमा एकादशी के बाद निर्जला एकादशी कब मनाई जाएगी?

    परमा एकादशी के बाद निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। निर्जला साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। 

  • 10:03 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ekadashi Vrat Mein Kya Khana Chahiye: एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए?

    एकादशी व्रत में फलाहारी भोजन जैसे दूध, दही, पनीर, फल, मूंगफली, काजू, बादाम इत्यादि का सेवन कर सकते हैं। लेकिन अन्न का सेवन भूलकर भी नहीं करना है। 

  • 9:39 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    11 June Ko Kaun Si Ekadashi Hai: कल कौन सी एकादशी है?

    11 जून को परम एकादशी है। ये एकादशी तीन साल में एक ही बार आती है जब अधिकमास पड़ता है। कहते हैं इस एकादशी का व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

  • 8:44 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    एकादशी व्रत कैसे रखते हैं?

    एकादशी व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और एकादशी की कथा सुनते हैं। फिर रात्रि भर जागरण करते हैं। इसके बाद द्वादशी पर व्रत का पारण करते हैं। इस व्रत में फलाहारी भोजन का सेवन किया जा सकता है।

  • 8:12 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Parama Ekadashi 2026 Live: परम एकादशी किस महीने में आती है?

    परम एकादशी अधिकमास में आती है। इस साल अधिकमास ज्येष्ठ महीने में लगा है इसलिए इस बार की परम एकादशी ज्येष्ठ अधिक एकादशी कहलाएगी। मान्यताओं अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से दरिद्रता का नाश होता है।

  • 7:44 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Parama Ekadashi vrat Ka Mahatva: परम एकादशी व्रत का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। कहते हैं इस व्रत को करने से ही धन के देवता कुबेर जी और सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी अपने खोए हुए ऐश्वर्य की प्राप्ति की थी। मान्यता है कि अधिक मास की इस एकादशी का व्रत रखने से स्वर्ण दान और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है।

     

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।